Pages

Monday, May 8, 2023

ज़िंदगी


कहते है ज़िन्दगी ख़ुशी और घम का संगम है

कभी ख़ुशी कि आशियाँ तो कभी घमों के अंधियारे है

ज़िन्दगी की धूप और छाँव को कहाँ कहाँ नहीं देखा मैंने

कभी फूलों के मुस्कान में, तो कभी नीले आसमान मे तैरते बादलों में

कभी सपनों के नय्या में, तो कबि यादों के शैय्या में 

कभी किताबों के नशे में, तो कभी प्रकृति की मधुर संगीत में

कभी मेहनत के पसीने में, तो कभी आँखों के आँसुओं में

कभी दोस्तों के हँसी में, तो कभी बड़ों के आशीर्वाद में

ज़िन्दगी की रंगों में पता नहीं कब वक्त की गाडी निकलती गयी

वहाँ मैं ख़यालों में सपने बुनती रही, और यहाँ ज़िन्दगी की कारवां यूँही जुड़ता गया